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आर्थिक राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक गतिविधियों में नारी की भूमिका पुरुष के बराबर लाने के प्रयास हुए। भारतीय फिल्मों, समाचार-पत्रों तथा तथा साहित्यों मे स्त्री पुरुष सम्बन्धों में बराबरी और स्वतंत्रता का ेध्यान में रखकर निरंतर अभिव्यक्तियॉं दी संचार माध्यमों के विकास से भी भारतीय नारी का संपर्क अपने देश में ,और बाहर भी तेजी से बढ़ा। इतनी क्षमता रखने के बावजूद भी आजादी की आधी सदी गुजर जाने के बाद भी आज शिक्षा की दृष्टि से लडकी को निरक्षर रखने या लडको को निरक्षर रखने में लडको की तुलना में साधारणसी शिक्षा देने की औपचारिकता है । आर्यो की सभ्यता और संस्कृति के प्रारम्भिक काल में महिलाओं की स्थिति बहुत सुदृढ़ रही है। ऋग्वेदकाल में स्त्रियाँ उस समय की सर्वोच्च शिक्षा अर्थात ब्रहमज्ञान प्राप्त कर सकती थी। ऋग्वेद में सरस्वती कीवाणी की देवी कहा गया है जो उस समय नारी की शास्त्र एवं कला के क्षेत्र में निपुणता का परिचायक है।पुराणकाल एवं मुगलकाल में स्त्री कुछ बंधनो में जकडी हुई जरुर दिखी है।अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीयसमाज में एक साथ अनेक तरह के परिवर्तन आये जिसमे नारी की स्थिति को उन्नत करने के अभियान चलायेगये। राजनीति, व्यापार तथा अन्य सार्वजनिक गतिविधियों में पुरुषों की तुलना मेंउसे पीछे रखने का और पुरुष की तुलना में बराबरी का हक मांगने पर शारीरिक और मानसिक यातना देने काक्रम अभी भी क्यो जारी है ऐसा लिंग भेद आखिर क्यों । ऐसी स्थिति के कारण है आधुनिक कवि ने सुमित्रानंदनपंत जी ने कहा है -
’’नारी की होना ही है अब मुक्त धरा पर,
युग कर्म होगा उसकी इच्छा पर निर्भर ।’’2
Keywords:
पुराण काल, मुगल काल, ब्रिटिश काल, शिक्षा, ज्ञान सुदृड नारी के रूप, वैदिक काल
Cite Article:
"भारतीय समाज में नारी की स्थिति : वर्तमान एवं भविष्य", International Journal for Research Trends and Innovation (www.ijrti.org), ISSN:2455-2631, Vol.8, Issue 4, page no.499 - 500, April-2023, Available :http://www.ijrti.org/papers/IJRTI2304082.pdf
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000205427
ISSN:
2456-3315 | IMPACT FACTOR: 8.14 Calculated By Google Scholar| ESTD YEAR: 2016
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