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संत मसीह दास छत्तीसगढ़ की लोक-संत परंपरा के एक महान और प्रभावशाली रचनाकार माने जाते हैं। वे ऐसे संत-कवि थे जिनकी वाणी लोकजीवन से उपजी हुई थी और जिनके गीतों में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक नैतिकता तथा मानवीय संवेदना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ी भाषा में रचित उनके गीत आज भी ग्रामीण जनजीवन में गाए जाते हैं और लोकमानस को दिशा प्रदान करते हैं।
संत मसीह दास का जन्म छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश में हुआ माना जाता है। उनके जन्म-वर्ष और स्थान को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं, किंतु यह सर्वमान्य है कि उनका जीवन सामान्य जन के बीच बीता। उन्होंने औपचारिक शास्त्रीय शिक्षा भले ही न प्राप्त की हो, परंतु लोकअनुभव, संत-संगति और आत्मचिंतन ने उन्हें एक महान लोकद्रष्टा बना दिया। उनका जीवन सादगी, तप और सेवा से परिपूर्ण था। संत मसीह दास पर छत्तीसगढ़ की संत-परंपरा, विशेषकर कबीर, गुरु रविदास और गुरु घासीदास के विचारों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। वे निर्गुण भक्ति के पक्षधर थे और बाह्य आडंबर, कर्मकांड तथा पाखंड का विरोध करते थे। उनके अनुसार ईश्वर मंदिर या तीर्थ में नहीं, बल्कि शुद्ध मन और सच्चे कर्म में निवास करता है। यही दर्शन उनके छत्तीसगढ़ी गीतों में बार-बार प्रकट होता है।
उनके गीतों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे लोकभाषा में गहन जीवन-सत्य प्रस्तुत करते हैं। जीवन की नश्वरता, कर्म का महत्व, श्रम का गौरव, सामाजिक समानता, करुणा और मानवता—ये सभी तत्व उनके गीतों में सहज रूप से व्यक्त हुए हैं। उन्होंने जाति, ऊँच-नीच और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया तथा मानव-मानव की समानता पर बल दिया। इसी कारण उनके गीत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के भी सशक्त माध्यम बने।
संत मसीह दास का जीवन स्वयं उनके दर्शन का प्रतिरूप था। वे कथनी और करनी के संत थे। लोकजीवन के दुख-सुख को उन्होंने निकट से देखा और उसी अनुभव को अपनी वाणी में ढाला। उनके गीत खेत-खलिहान, जंगल, श्रम और पारिवारिक जीवन से जुड़े प्रतीकों के माध्यम से जनसामान्य को नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा देते हैं।
Keywords:
संत मसीह दास, छत्तीसगढ़ी लोकगीत, लोक-संत परंपरा, जीवन-दर्शन, निर्गुण भक्ति, कर्म-सिद्धांत, सामाजिक समानता, मानवता, नारी-दृष्टि, श्रम और लोकजीवन, लोकभाषा, प्रतीकात्मकता।
Cite Article:
"Great composer of Chhattisgarhi songs: Saint Masih Das", International Journal for Research Trends and Innovation (www.ijrti.org), ISSN:2456-3315, Vol.11, Issue 2, page no.a392-a398, February-2026, Available :http://www.ijrti.org/papers/IJRTI2602052.pdf
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ISSN:
2456-3315 | IMPACT FACTOR: 8.14 Calculated By Google Scholar| ESTD YEAR: 2016
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