Scholarly open access journals, Peer-reviewed, and Refereed Journals, Impact factor 8.14 (Calculate by google scholar and Semantic Scholar | AI-Powered Research Tool) , Multidisciplinary, Monthly, Indexing in all major database & Metadata, Citation Generator, Digital Object Identifier(DOI)
भारतीय अर्थव्यवस्था को उदीयमान अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में रखा जाता है। क्योंकि भारत में आर्थिक सुधारों (1991) के पश्चात् उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुईहै, जिस कारण अर्थव्यवस्थाओं की संवृद्धि दर वर्तमान में लगभग 7.5 फीसदी बनी हुई है। साथ ही कृषि क्षेत्र की अपेक्षा उद्योग और सेवा क्षेत्र का योगदान भी निरंतर बढ़ रहा है। विश्व बैंक द्वारा जारी वर्गीकरण के अनुसार भारत को निम्न मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है। इस दृष्टि से भारत को अपना स्तर वैश्विक परिदृश्य में ऊंचा उठाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना होगा।
‘मेकइनइण्डिया‘ (भारत में बनाओ) योजना के वांछित लक्ष्यों को अर्जित करने के लिए आवश्यक है कि इसमें स्थानीय उद्यमी, विदेशी निवेशक तथा अर्न्राष्ट्रीय संगठन आवश्यक सहयोग करें। इसके साथ ही भारत के पड़ौसी देश भी सराहनीय सहयोग प्रदान करें। उक्त सभी तत्व मुक्त हस्त सहयोग प्रदान करेंगे तब ही इस योजना की दिशा तय होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब इस योजना का सितम्बर 2014 में शुभारम्भ किया था उस अवसरपर भारत के ख्याति-लब्ध उद्योगपति भी उपस्थित थे। योजना के सन्दर्भ में इन्होंने अत्यधिक रूचि प्रदर्शित की थी तथा तत्काल निवेश की राशि की भी घोषणा की थी। कई देशों ने इस पहल में आश्वासन दिया तथा निवेश हेतु अपने हाथ आगे बढाए।
संयोग अथवा दुर्संयोग देखिए उसी दिन पड़ौसी देश चीन ने भी ‘मेकइनचाइना‘ कार्यक्रम का आरम्भ किया था। भारत का उद्देश्य विदेशी वस्तुओं के आयातको कम करना तथा निर्यात को प्रोत्साहन देना है। यह तभी सम्भव हो सकता है जब भारत एक ‘‘मैन्युफेक्चरिंग हब’’ बने। इसका आशय यह नही है कि भारत विदेशी माल के आयात का विरोधी है, लेकिन भारत चाहता है कि मुक्त-व्यापार में भारतीय अर्थव्यवस्था को घाटा नही होना चाहिए। अतः भारतीय नीति-निर्माताओं ने भारत में निर्मित माल को विदेशों में निर्यात के उद्देश्य से ‘‘भारत में बनाओ’’ योजना को आधार बनाया।1पड़ौसी देशों के साथ भी भारत ने कई समझौते एवं करार किये हैं।इनमें अफगानिस्तान, चीन, जापान कोरिया है। उक्त सभी तथ्य योजना की भावी सफलता के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। प्रस्तुत आलेख में इन सभी तथ्यों को संक्षिप्त में प्रस्तुत किया जा रहा है।
Keywords:
केन्द्रसरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 की अवधि मेंविनिवेश से 80,000 करोड़ रूपए एकत्रितकरने का लक्ष्य रखा है।केन्द्रसरकार द्वारा 1 जनवरी, 2019 कोजारीआंकड़ो के अनुसारवर्ष 2018 मेंसार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयोंमेंअपनीभागीदारी की बिक्रीकरकेरिकॉर्ड 77,417 करोड़ रूपए जुटाए हैं।यह तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ 2019 मेंभीनिरन्तररहने की प्रत्याशाहै। 2018 मे हुयेबड़ेविनिवेशसौदोंमेंओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसईईटीएफ, भारत-22 ईटीएफऔरकोलइंडिया की भागीदारीबिक्रीसहित 6 आरंभिकसार्वजनिकनिर्गमसहितअन्य सम्मिलितहै।
Cite Article:
"भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘मेक इन इण्डिया‘ योजना की भूमिका", International Journal for Research Trends and Innovation (www.ijrti.org), ISSN:2455-2631, Vol.8, Issue 5, page no.537 - 542, May-2023, Available :http://www.ijrti.org/papers/IJRTI2305083.pdf
Downloads:
000205160
ISSN:
2456-3315 | IMPACT FACTOR: 8.14 Calculated By Google Scholar| ESTD YEAR: 2016
An International Scholarly Open Access Journal, Peer-Reviewed, Refereed Journal Impact Factor 8.14 Calculate by Google Scholar and Semantic Scholar | AI-Powered Research Tool, Multidisciplinary, Monthly, Multilanguage Journal Indexing in All Major Database & Metadata, Citation Generator