à¤à¤¾à¤°à¤¤ के गाà¤à¤µà¥‹à¤‚ की सामाजिक, आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और राजनैतिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ मे ं पंचायतो की à¤à¥‚मिका हमेषा ही महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ रही है ।पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही पंचायतें किसी न किसी रूप में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ थी। सà¥à¤µà¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के पषà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ à¤à¤¾à¤°à¤¤ का नया संविधान बना किनà¥à¤¤à¥ उसके मू लपà¥à¤°à¤¾à¤°à¥‚प मे पंचायतों का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ नही था। राजà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के संदरà¥à¤ मंे गांधीजी ने यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया था कि निचले सà¥à¤¤à¤° पर पंचायतों को रखना होगा, अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ उचà¥à¤š और मधà¥à¤¯ का तंतà¥à¤° गिर जाà¤à¤—ा और उनके विचार के अनà¥à¤°à¥‚प देष मे गांवो को सà¥à¤µà¤¾à¤µà¤²à¤®à¥à¤¬à¥€ और आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤à¤° बनाने के लिठपंचायतों को आधारषिला मान गया था। पंचायतों की वैचारिक अवधारणा के रूप में ही उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ ‘गà¥à¤°à¤¾à¤® गणतंतà¥à¤°â€™ की परिकलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ पर बल दिया था। पंचायत पर गांधीजी के विचार का संविधान निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के कà¥à¤°à¤® में संविधान सà¤à¤¾ मे चल रही बहस मे विषद चरà¥à¤šà¤¾ हà¥à¤ˆ थी और पंचायत की सारà¥à¤¥à¤•ता पर वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• समरà¥à¤¥à¤¨ मिला था। तदà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤ संविधान सà¤à¤¾ के सदसà¥à¤¯ के संथानम ने पंचायत के पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ हेतॠà¤à¤• संषोधन पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया जिसके आधार पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संविधान के राजà¥à¤¯ नीति निरà¥à¤¦à¥‡à¤·à¤• ततà¥à¤µ के अनà¥à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦ 40 में पंचायतों के संबंध में à¤à¤• संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ उलà¥à¤²à¥‡ ख को समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ किया गया जà¥à¤žà¤¾à¤¤à¤µà¥à¤¯ है कि नीति निरà¥à¤¦à¥‡à¤·à¤• ततà¥à¤µ के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ को लागू करने हेतॠकेनà¥à¤¦à¥à¤° और राजà¥à¤¯ सरकारों पर कोई संवैधानिक बाधà¥à¤¯à¤¤à¤¾ नहीं होती है। पंचायतों के संबंध में संविधान के संबंध में संविधान के अनà¥à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦ 40 मे ंजिस संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– है वह निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैः ‘‘राजà¥à¤¯ गà¥à¤°à¤¾à¤® पंचायतों का संगठन करने के लिठकदम उठाà¤à¤—ा और उनको à¤à¤¸à¥€ षकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ और अधिकार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करेगा जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤µà¤¾à¤¯à¤¤à¥à¤¤ षासन इकाईयों के रूप मे कारà¥à¤¯ करने योगà¥à¤¯ बनाने के लिठआवषà¥à¤¯à¤• हो’’।
बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤· काल मंे à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के गांवो में गà¥à¤°à¤¾à¤® पंचायतें, जाति पंचायतें और वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ से संबंधित पंचायतें कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ रही। उस दौर में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समसà¥à¤¤ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं को वैधानिक सà¥à¤µà¤°à¥‚प में ढाला जाने लगा। सनॠ1859 में पà¥à¤°à¥à¤¤à¤—ाल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° गोआ में पारà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ नं. 7575 नामक कानून के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ‘‘जà¥à¤£à¥à¤Ÿà¤¾ फà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤µà¥‡à¤·à¤¿à¤¯à¤¾â€™â€™ नामक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤·à¤¾à¤¸à¤¨ संसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ गठित होने लगी। सनॠ1870 में बंगाल में ‘चौकीदारी अधिनियम’’ पारित हà¥à¤†à¥¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤ मे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤·à¤¾à¤¸à¤¨ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं का मैगà¥à¤¨à¤¾à¤•ारà¥à¤Ÿà¤¾ कहलाने वाला पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ सनॠ1882 मंे लॉड ‘रिपन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लाया गया। इसमें गà¥à¤°à¤¾à¤® पंचायतों, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पंचायतों तथा जिला बोरà¥à¤¡à¥‹ के गठन का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ था। इस कà¥à¤°à¤® में पहला पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ मदà¥à¤°à¤¾à¤¸ लोकल बॉडीज à¤à¤•à¥à¤Ÿ 1884 के रूप में सामने आया। à¤à¤¸à¥‡ ही कानून अनà¥à¤¯ राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ बनने लगे।
सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ के पषà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ 2 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1952 को सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• विकास कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® लागू किया गया, किनà¥à¤¤à¥ यह कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ अंचलों मे सफलता पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं कर सका। इसी कà¥à¤°à¤® में विफलता के कारणों को जानने à¤à¤µà¤‚ नयी रणनीति सà¥à¤à¤¾à¤¨à¥‡ हेतॠबलवंत राय मेहता समिति गठित की गई।
2 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1957 को केनà¥à¤¦à¥à¤° सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बलवंत राय मेहता समिति गठित की गई। इस समिति की रिपोरà¥à¤Ÿ में इस बात की सिफारिष की गई कि सरकार को गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के विकास के लिठसंसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ गठित कर विकास का सारा कारà¥à¤¯ इनको सौंप दिया जाना चाहिठइसके अंतरà¥à¤—त जनता दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ चà¥à¤¨à¥‡ गठसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤·à¤¾à¤¸à¤¨ के तीन ढाà¤à¤šà¥‡ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की गई निचले सà¥à¤¤à¤° पर अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ बà¥à¤²à¥‰à¤• मे पंचायत समिति और सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° पर यानि जिले मे जिला परिषद।
सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® 2 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर, 1959 को राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ मे पंचायती राज की नई तà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की षà¥à¤°à¥‚आत हà¥à¤ˆ यह उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¥à¤® पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 2 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर, 1959 को नागौर राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ मे बलवंत राय मेहता समिति की अनà¥à¤·à¤‚साओं पर आधारित तà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पंचायती राज के उदà¥à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ à¤à¤¾à¤·à¤£ मे कहा था- ‘‘हम लोग अपने देष मे लोकतंतà¥à¤° अथवा पंचायती राज की आधारषिला रखने जा रहे है यदि महातà¥à¤®à¤¾ गांधी अपने बीच होते तो कितने पà¥à¤°à¤«à¥à¤²à¥à¤²à¤¿à¤¤ होते। यह à¤à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• कारà¥à¤¯ है और इससे उनको बड़ी पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ होती कि यह à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• कदम उनके जनà¥à¤®-दिवस पर उठाया गया’’ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के बाद आनà¥à¤§à¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤· मे पंचायती राज लागू हà¥à¤†à¥¤ फिर 1960-61 तक राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ मे अधिनियम बना और पंचायती राज की विधिवत षà¥à¤°à¥‚आत हà¥à¤ˆà¥¤ केनà¥à¤¦à¥à¤° में पà¥à¤°à¤¥à¤® बार गैर कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€ जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ सरकार के सतà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥‚ढ होते ही à¤à¤• बार पà¥à¤¨à¤ƒ ‘गà¥à¤°à¤¾à¤® राज’ की मांग बलवती होने लगी। पंचायतीराज संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤·à¤¾ को देखते हà¥à¤ यह आवषà¥à¤¯à¤• था कि इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€à¤µà¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाà¤à¥¤ इसी कà¥à¤°à¤® में मंतà¥à¤°à¤¿à¤®à¤£à¥à¤¡à¤² सचिवालय के पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 12 दिसमà¥à¤¬à¤°, 1977 को अषोक मेहता समिति का गठन किया गया। समिति ने अपनी रिपोरà¥à¤Ÿ ;1978 में उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है ‘‘पंचायती राज उतार-चà¥à¤¾à¤µ की कहानी है, à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होता है कि यह तीन अवसà¥à¤¥à¤¾ से गà¥à¤œà¤°à¤¾ है- आरोहण की अवसà¥à¤¥à¤¾ ;1959-64, तक निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ की अवसà¥à¤¥à¤¾ ;1965-69, और अवनति की अवसà¥à¤¥à¤¾ ;1969-77,’’ अषोक मेहता समिति ने अपनी रिपोरà¥à¤Ÿ में पंचायती राज की अवनति के चार मà¥à¤–à¥à¤¯ कारणों का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है।
पà¥à¤°à¤¥à¤®, चतà¥à¤°à¥à¤¥ पंचवरà¥à¤·à¥€à¤¯ योजना की अवधि में कई तरह के लकà¥à¤·à¥à¤¯ समूहों से संबंधित विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ योजनाओं हेतॠनई सरकारी à¤à¤œà¥‡à¤¨à¥à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जिला सà¥à¤¤à¤° पर सृजन किया गया और सà¤à¥€ को निरà¥à¤µà¤¾à¤šà¤¿à¤¤ जिला परिषद के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ार से बाहर रखा गया। नतीजन पंचायती राज को à¤à¤¸à¥‡ वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ से वंचित रहना पड़ा।
दूसरा, राजनेताओं का पंचायती राज संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं को षकà¥à¤¤à¤¿à¤·à¤¾à¤²à¥€ बनाने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ कोई उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ नहीं था। कà¥à¤› राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में तो पंचायती राज संसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤ à¤à¤‚ग थी और नठचà¥à¤¨à¤¾à¤µ को लमà¥à¤¬à¥‡ अरà¥à¤¸à¥‡ तक टाल दिया गया था।
तीसरा, पंचायती राज की वैचारिक अवधारणा के संबंध मे कोई सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ चितà¥à¤° नहीं था। कà¥à¤› लोग इसे सरकारी à¤à¤œà¥‡à¤¨à¥à¤¸à¥€ मानते थे, कई इसे लोकतंतà¥à¤° का विसà¥à¤¤à¤¾à¤°, और कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने इसे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ षासन की संसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ माना था।
चौथा, पंचायती राज संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ पर आरà¥à¤¥à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ सामाजिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µ था, अतः आम गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ के लिठइन संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं की उपयोगिता घट गई थी। इन तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बावजूद अषोक मेहता समिति ने इस बात का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया था कि गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ विकास हेतॠजहाठà¤à¥€ इसे जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ सौंपी गई वहाठअचà¥à¤›à¤¾ काम हà¥à¤† था। महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° और गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ मे इस दिषा में सफल पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ हà¥à¤† था। अतः पंचायती राज को असफल मानना, इसका सही आकलन नहीं होगा।
असà¥à¤¸à¥€ के दषक मे पषà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ बंगाल, करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• और आनà¥à¤§à¥à¤°à¤ªà¤¦à¥‡à¤· की नवगठित सरकारों की पहल पर पंचायती राज का पà¥à¤¨à¤ƒ उदय हà¥à¤†à¥¤ पषà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल मे 1977 में जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ बसॠके नेतृतà¥à¤µ मे आई वामपंथी सरकार ने राजà¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ पंचायत अधिनियम 1972 के आधार पर ही 1978 मे पंचायती राज संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करवाकर इन संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं को विकास कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®, साकà¥à¤·à¤°à¤¤à¤¾ अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ और à¤à¥‚मि सà¥à¤§à¤¾à¤° के कारà¥à¤¯à¥‹ को सौंपा, उस समय से निरनà¥à¤¤à¤° हर पांच वरà¥à¤· की कारà¥à¤¯ अवधि पर पषà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल में पंचायतों का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो रहा है। इसी तरह 1983 मे करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• में रामकृषà¥à¤£ हेगड़े के नेतृतà¥à¤µ में आई जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ सरकार ने 1985 में पंचायती राज पर अषोक मेहता समिति के कà¥à¤› सà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर नया पंचायत अधिनियम बनाया और उसी आधार पर 1987 में वहाठचà¥à¤¨à¤¾à¤µ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤†à¥¤ इस अधिनियम ने कमजोर वरà¥à¤—ो, अनà¥à¤¸à¥‚चित जाति और जनजाति के परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ हेतॠ18 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¤¤ सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ आरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया और महिलाओं की सदसà¥à¤¯à¤¤à¤¾ हेतॠयह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर आरकà¥à¤·à¤£ का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ रखा गया था। इसी तरह आनà¥à¤§à¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤· मे 1983 में à¤à¤¨.टी. रामराव के नेतृतà¥à¤µ मे आई तेलगू देषमॠपारà¥à¤Ÿà¥€ में 1986 में पंचायती राज पर नया अधिनियम बनाया जिसका ढाà¤à¤šà¤¾ कनारà¥à¤Ÿà¤• के तरà¥à¤œ पर था। कमजोर वरà¥à¤—ो और महिलाओं की सदसà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के साथ-साथ अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¥‹à¤‚ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ हेतॠà¤à¥€ आरकà¥à¤·à¤£ का पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ आनà¥à¤§à¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤· के नठअधिनियम मे रखा गया।
पंचायती राज के विकास में कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारी पहल मई 1989 में हà¥à¤ˆ जब ततà¥à¤•ालीन पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ राजीव गांधी ने पंचायती राज पर 64 वाठसंविधान संषोधन विधेयक संसद में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया। इस विधेयक ने पंचायती राज को संविधान दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बाधà¥à¤¯à¤•ारी विषय बना दिया गया और इसक सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ हेतॠहर वरà¥à¤· पर चà¥à¤¨à¤¾à¤µ कराना राजà¥à¤¯ के लिठबाधà¥à¤¯à¤•ारी कर दिया गया। नतीजन उकà¥à¤¤ विधेयक लोकसà¤à¤¾ में पारित हो गया। किंतॠसतà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥‚ॠकांगà¥à¤°à¥‡à¤‚स का राजà¥à¤¯à¤¸à¤à¤¾ में दो-तिहाई बहà¥à¤®à¤¤ नहीं रहने के कारण उस सदन में यह विधेयक पारित नहीं हो सका। पà¥à¤¨à¤ƒ कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के नरसिंह राब सरकार के समय 73वें संविधान संशोधन के चà¥à¤¨à¤¾à¤µ रूप में पंचायती राज पर à¤à¤• नया विधेयक 29 दिसमà¥à¤¬à¤°, 1992 को लोकसà¤à¤¾ में और 23 दिसमà¥à¤¬à¤°, 1992 को राजà¥à¤¯à¤¸à¤à¤¾ में à¤à¤¾à¤°à¥€ बहà¥à¤®à¤¤ से सरà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥à¤®à¤¤à¤¿ के करीबदà¥à¤§ पारित हà¥à¤†à¥¤ इस बात में हमेशा ही माना जाà¤à¤—ा कि पंचायती राज को संवैधानिक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ देकर मजबूत बनाने की दशा में सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ीय राजीव गांधी की अहम à¤à¥‚मिका थी दà¥à¤¯ 73वें संविधान संशोधन का उदà¥à¤—म राजीव गांधी के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ काल में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया 64वां संविधान संशोधन विधेयक ही था।